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विवाहित हैं लेकिन मंगलसूत्र नहीं पहनतीं ? जानिए ये बहुत जरूरी 5 बातें

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मंगलसूत्र, काले पीले मोतियों और सोने से बना एक सुंदर से गहना जो आजकल ढेरों डिजाइन में उपलबध है । लेकिन क्‍या आप इसकी महत्‍ता का जानती हैं । जानिए मंगलसूत्र से जुड़ी ये खास बातें ।

New Delhi, Apr 26 : शादी से पहले और शादी के बाद एक लड़की के रूप रंग, पहनावे में कई बदलाव आते हैं । सुहाग के प्रतीक के रूप में उसे सिर से लेकर पैर तक गहनों, परंपराओं से सजा दिया जाता है । सुहाग के इन प्रतीकों में एक चीज बहुत खास है मंगलसूत्र । सिंदूर के बाद दूसरी चीज जो खास है वो मंगलसूत्र ही मानी जाती है । विवाह की रस्‍मों के समय मंगलसूत्र पहनाकर पुरुष स्‍त्री को अपना बनाता है और स्‍त्री अपने दांपत्‍य जीवन पर पड़ने वाली हर बुरी नजर से बचाने के लिए इस मंगलसूत्र को धारण करती है । आगे जानिए मंगलसूत्र से जुड़ी कुछ बहुत खास बातें ।

बुरी नजर से बचाता है
मूलत: मंगलसूत्र काले मोतियों और सोने से बना होता है, मंगलसूत्र के काले मोती दंपति को बुरी

नजर से बचाते हैं । ये शनि की काली छाया से बचाव करते हैं । मंगलसूत्र के मोती अगर टूटकर गिर जाएं तो उन्‍हें समेटकर दोबारा पिरो दें । ज्‍योतिष में मंगलसूत्र को विपत्तियों से बचाने वाला बताया गया है । इसे पहनना आवश्‍यक माना गया है ।

सोना पहनना क्‍यों है जरूरी  
ज्योतिष के अनुसार सोना गुरू ग्रह के प्रभाव में होता है । ये ग्रह वैवाहिक जीवन में खुशहाली,

संपत्ति और ज्ञान का कारक होता है । यह ग्रह धर्म का भी कारक है ।  सोना पहनने से सकारात्‍मक ऊर्जा का उत्‍सर्जन होता है और ये हृदय के लिए बहुत लाभदायक होता है । गले में सोना पहनने से  स्‍त्री का इम्‍यून सिस्‍टम स्‍ट्रॉन्‍ग रहता है ।

कप डिजाइन है सबसे पुराना
आजकल बाजार में कई प्रकार के मंगलसूत्र मौजूद हैं । मनभावन डिजाइन में ये मंगलसूत्र सुहागिन

महिलाओं का बहुत भाते हैं । लेकिन इसका पारंपरिक डिजाइन दो कप वाला ही है । ये कप सत्‍व सत्व गुणों से भरपूर माने जाते हैं । इन्‍हें शिव और शक्ति का प्रतीक माना जाता है । शिव शक्ति एक दूसरे के पूरक कहे जाते हैं, इनके प्रेम से अधिक प्रेम की व्‍याख्‍या कहीं नहीं मिलती ।

मंगलसूत्र का महत्‍व
भारत के हर राज्‍य में मंगलसूत्र अलग-अलग तरह के प्रयोग में लाए जाते हैं । महाराष्‍ट्र में अलग

तरह के मंगलसूत्र पहने जाते हैं तो वहीं दक्षिण भारत में अलग । लेकिन मंगलसूत्र पहनने के मायने सभी जगह एक रहते हैं । सुहागिन की पति की लंबी उम्र की कामना और बुरी नजर से उनका बचाव । इसे अलग अलग नामों से भी पुकारा जाता है लेकिन सबका अर्थ एक ही होता है ।
मंगलसूत्र उतारना नहीं चाहिए
प्राचीन मान्‍यताओं के अनुसार पति ने एक बार गले में मंगलसूत्र पहना दिया तो वो तब तक नहीं उतारा जा सकता जब तक कोई अनहोनी ना हो जाए । अन्‍यता किसी भी परिस्थिति में मंगलसूत्र को उतारने की मनाही है । इसका खोना और टूटना दोनों ही अशुभ माना जाता है । मंगलसूत्र यदि कभी उतारना भी पड़े तो उसकी जगह पर एक काला धागा गले में डाल लेना चाहिए ।

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28 September, इस ‘शनिश्चरी अमावस्या’ करें ये उपाय, शनिदेव खुश हो जाएंगे

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अमावस्‍या अगर शनिवार को पड़े तो उसे शनिश्‍चरी अमावस्‍या या शनि अमावस्‍या कहते हैं । औइस बार तो पिृतपक्ष का भी संयोग है । जानें इस दिन शनि दोष से मुक्ति पाने के कुछ खास उपाय ।

New Delhi, Sep 24: शनिश्‍चरी अमावस्‍या के दिन शनिदेव को प्रसन्‍न करने के लिए कुछ उपाय किए जाएं तो आप शनि दोष से मुक्‍त हो सकते हैं । अमावस्‍या के दिन पूर्वजों को याद करते हुए दान देना शुभ माना जाता है, साथ ही इस दिन किए गए कुछ खास उपाय आपकी कई चिंताओं को दूर करते हैं । शनिवार को अमावस्‍या का पड़ना एक शुभ योग है, न्‍याय के देवता शनिदेव को प्रसन्‍न कर आप जीवन पर मंडरा रहे काले बादलों को दूर कर सकते हैं ।

सांयकाल में करें पूजा
शनिश्‍चरी अमावस्‍या के दिन शनिदेव की पूजा करते हुए कुछ बातों का ध्‍यान रखें । पूजा की सामग्री

  में सरसों का तेल, तिल का तेल, काली उड़द की दाल और काले तिल का होना अति आवश्‍यक है । इसके अतिरिक्‍त शनि देव को धूप, दीप, नील, फूल और फल, नौवेद्य के साथ काले रंग के वस्त्र अर्पित करने चाहिए । शनिदेव की पूजा संध्‍याकाल में करने से वो प्रसन्‍न होते हैं ।

शनिश्‍चरी अमावस्‍या का एक खास उपाय
सूर्यास्‍त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक प्रज्‍वलित करें । इस दिन गणेश

जी और भगवन विष्णु की पूजा भी विशेष फलदाई होती है । आप स्‍नान आदि कर दोनों भगवान की आराधना करें, पीपल के पेड़ के चारों ओर कच्‍च सूत लेकर 7 बार परिक्रमा करें और फिर दीप दान करें । पीपल का पेड़ ईश्‍वर तुल्‍य माना जाता है, इनका संबंध शनिदेव से बेहद मजबूत है इसलिए सिर्फ अमावस्‍या पर ही नहीं आप प्रत्‍येक शनिवार पीपल के पेड़ के नीचे दीपदान करें ।

इस मंत्र का करें जाप
शनिश्‍चरी आमावस्‍या पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अच्‍छा होता है । इस दिन पितरों का

श्राद्ध भी कर सकते हैं । इस मंत्र का जाप करने के लिए आपको इसके उव्‍च्‍चारण का विशेष ध्‍यान रखना होगा । इस दिन शनि स्त्रोत, शनि चालीसा का पाठ भी करना चाहिए । शनि दोष से मुक्ति मिलती है । शनि अमावस्‍या का शुभ योग व्‍यर्थ ना जाने दें, इन उपायों को कर आप भी जीवन में आ रही परेशानियों को दूर कर दें ।

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घर के कोने-कोने का वास्‍तुदोष दूर करने का सबसे सटीक उपाय, अब तक किसी ने नहीं बताया होगा

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नमक किसी भी खाने का स्‍वाद बढ़ा देता है … उसी तरह वास्‍तु दोषों को देर करने में नमक का बड़ा अहम रोल है । चुटकी भर नमक के साधारण से उपाय कई समस्‍याओं का निवारण करने में सक्षम हैं ।

New Delhi, Sep 09: नमक के उपाय, ये सुनकर आप शायद इसे हंसी में लें, या फिर अंधविश्‍वास समझकर इसे मानें ही ना । लेकिन वास्‍तु शास्‍त्र में नमक के कुछ ऐसे आसान और सरल से उपाय दिए गए हैं जिन्‍हें अपनाकर आन धन, दरिद्रता और सेहत संबंधी कई परेशानियों का समाधान प्राप्‍त कर लें । ज्‍योतिष शास्‍त्र भी नमक के उपायों को चमत्‍कारी मानता है ।
दरिद्रता दूर करता है नमक – घर में नकारातमकता के कारण आती है दरिद्रता । और इसे दूसर करने का उपाय है समुद्री नमक । गुरुवार के दिन आप समुद्री नमक मिले पानी से पोछा लगाएंगे तो घर की नेगेटिव एनर्जी कम होगी । ये उपाय हर गुरुवार करने से घर से नकारात्‍मकता खत्‍म हो जाएगी ।

दूर होगा बाथरूम और टॉयलेट का वास्‍तु दोष
हर तरह की गंदगी को दूर करने की क्षमता रखता है नमक । एक कांच की कटोरी में समुद्री नमक

डालकर, इस कटोरी को अपने बाथरूम में रखें ।इसी तरह टॉयलेट में भी नमक की कटोरी रखें । 15 दिन के अंतराल पर नमक को बदलते रहें । पुराना नमक टॉयलेट में ही बहा दें । ऐसा करने से नेगेटिव एनर्जी दूर हो जाएगी ।
पॉजिटिव विचारों के लिए – अगर आपका मन नकारात्‍मक हो रहा हो, किसी तरह की परेशानी, चिंता या डर आपको सता रहा हो तो दोनों हाथों में साबुत नमक लेकर थोड़ी देर खड़े रहें और फिर इस नमक को पानी में बहा दें ।

बना रहेगा धन का प्रवाह
अपने घर के साउथ – वेस्‍ट कॉर्नर में एक कांच के गिलास में पानी और नमक मिलाकर रख दें । इस

गिलास के पीछे लाल रंग का बल्‍ब लगा दें । गिलास में जब भी पानी सूख जाए तो इसे दोबारा भरकर वहीं रख दें । ये उपाय घर में धन का प्रवाह बनाए रखता है घर पर बरसेगी बरकत – कांच के बर्तन में नमक रखें उसमें कुछ लौंक डाल दें । अब इस बर्तन को घर के किसी भी सुरक्षित कोने में रख दें । इस उपाय से घर में बरकत बनी रहेगी । और धन की आवक बनी रहेगी, आपको कभी धन की कमी नहीं सताएगी ।

नमक से उतारें नजर
छोटे बच्‍चों को नजर बहुत जल्‍दी लगती है । नजर उतारने के दूसरे तरीके जैसे मिर्च या आग की

बत्‍ती का तरीका बच्‍चों के साथ करना थोड़ा कठिन हो जाता है । ऐसे में बच्‍चे की नजर आप नमक से उतारे । बच्‍चे को नजर लग जाए तो एक चुटकी नमक, सात बार  उस पर से उतारकर बहते पानी में डाल दें । या नल के बहते पानी में बहा दें ।
शनि का प्रभाव – अगर आप चाहते हैं शनि की कुदृष्टि आप पर ना पड़े तो खाने में नमक कम लगने पर सफेद नमक ऊपर से ना डालें । इसकी जगह काला नमक इस्‍तेमाल करें ।

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शनि से ज्‍यादा खतरनाक राहु-केतु, ये हैं अशुभ दशा के संकेत

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क्‍या आप जानते हैं राहु-केतु को छाया ग्रह भी कहा जाता है, क्‍योंकि इनकी छाया मात्र से मुश्किलों को आगमन शुरू हो जाता है ।

New Delhi, Aug 02 : राहु-केतु, ना तो ये ग्रह हैं और ना ही इनका अपना कोई अस्तित्‍व होता है, लेकिन कई बार ये अपना प्रभाव इतना बढ़ लेते हैं कि मनुष्‍य के लिए मुश्किलें ही मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं । शनि देव को क्रोध तब आता है जब कोई पाप कर्म करता है, लेकिन इन दो ग्रहों का तो स्‍वभाव ही पाप कर्म है । इसलिए ये किसी को भी अपना शिकार बना सकते हैं । शास्‍त्रों में इन दो ग्रहों को पापी ग्रह, छाया ग्रह कहा गया है । जिसकी छाया मात्र से व्‍यक्ति की मति भ्रष्‍ट हो जाती है ।

कुछ ऐसी बातें हैं जिन्‍हे पहले से भांपकर, समझकर आप जान सकते हैं कि राहु-केतु की दशा ठीक

नहीं चल रही है ताकि आप कुछ गलत होने से पहले ही ऐसे हालातों को रोक सकें । कुंडली में राहु-केतु का प्रभाव अन्‍य ग्रहों की चाल और दशा पर आधारित होता है । लेकिन इनकी महादशा शुरू हो जाए तो बुद्धि भटकते देर नहीं लगती और फिर व्‍यक्ति अपना ही बुरा करने लगता है । इन दो ग्रहों के प्रभाव से व्‍यक्ति अपने ही मान-सम्‍मान को क्षति पहुंचाने लगता है ।

ज्योतिष शास्त्र में इन ग्रहों को शनि का ही अनुचर माना गया है । कुंडली में राहु-केतु का प्रभाव

आना, व्यक्ति के बुरे कर्मों के फल स्वरूप शनि देव के ही न्याय का हिस्सा होता है। इनकी महादशा व्‍यक्ति को शारीरिक रूप से भी पीड़ित करती है और वो अचानक बीमार पड़ सकता है । शास्‍त्रों के मुताबिक शरीर में शरीर में राहु को ‘मस्‍तक’ और केतु को ‘धड़’ माना गया है । कुंडली में राहु गड़बड़ करे तो दिमाग प्रभावित होता है, वात, कफ जैसी तकलीफ शुरू हो जाती है ।

वहीं कुंडली में केतु की बुरी दशा हो तो पीडि़त को गले से नीचे के हिस्सों में परेशानी महसूस होती है

। फेफड़े, पेट और पैरों से जुड़ी दिक्‍कतें इन्‍हें सताने लगती हैं । कुंडली में राहु-केतु की अशुभ दशा हो तो व्‍यक्ति आलस से घिर जाता है । बुद्धि भ्रमित हो जाती है तो वो अपना भला – बुरा नहीं सोच पाता । ऐसे लक्षण दिखें तो समझ जाइए कुंडली में कुछ तो गड़बड़ है । किसी ज्‍योतिषी से मिलकर इसका समाधान करवाएं ।

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