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स्वास्थ्य

भूलकर भी ना खाएं ये फल, बहुत नुकसान दायक हो सकता है

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केला खाने के ढेरों फायदे आप ने आज तक सुने होंगे, लेकिन क्‍या आप जानते हैं इसे खाने के नुकसान भी हो सकते हैं । कुछ लोगों को केला भूल कर भी नहीं खाना चाहिए । किन्‍हें करना चाहिए केले से परहेज, आगे जानिए ।

New Delhi, May 13 : नैचुरल हैल्‍थ बूस्‍टर, एनर्जी का सबसे अच्‍छा सोर्स माने जाते हैं फल । फलों में भी एक फल ऐसा है जो सबकी पहुंच में है । वो फल है केला, विटामिन A, D , B6 और B 12 से भरपूर, कैल्शियम के सबसे सस्‍ते और बढि़या स्रोत, पोटैशियम की खान माने जाने वाले केले को लेकर हैल्‍थ एक्‍सपर्ट कुछ हिदायत दे रहे हैं । केले को लेकर कुछ लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए, लापरवाही करने पर केला ऐसे लोगों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है ।

डायबिटीज पेशेंट बचें
डायबिटीज यानी मधुमेह, ये एक ऐसी बीमारी है जो एक बार हो जाए तो जाने का नाम नहीं लेती ।

ऐसे में अगर मरीज केले का भी सेवन कर ले तो उसके लिए स्थिति गंभीर हो सकती है । केले में कार्बोहाइड्रेट और शुगर की मात्रा काफी ज्‍यादा होती है । इसे खाते ही बॉडी में शुगर लेवल बढ़ जाता है जो मधुमेह के रोगी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है ।

माइग्रेन में केला ना खाएं
कई लोगों को केला खाने के बाद सिरदर्द महसूस होता है । दरअसल केले में मौजूद तत्‍व थाइमीन

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इसका जिम्‍मेदार होता है । थइमीन शरीर में पहुंचकर सिरदर्द के लिए जिम्‍मेदार रसायन का उत्‍सर्जन करता है जिससे कुछ लोगों को दर्द महसूस होता है । लेकिन ऐसा कम ही लोगों में देखा जाता है । लेकिन जो लोग पहले से ही माइग्रेन के मरीज हैं उनके लिए केला खाने पर स्थिति थोड़ी मुश्किल हो सकती है ।

वजन बढ़ाता है केला
केले पर आई कई रिसर्च कहती हैं कि ये फैट बढ़ाने में नहीं बल्कि फैट घटाने में सहायक होता है ।

लेकिन ऐसा पूरी तरह सही नहीं है । केले में कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट और शुगर बहुत अधिक मात्रा में होता है जिसके चलते ये शरीर में फैट बढ़ाने में मदद करते हैं । मोटे लोगों को केले का सेवन कम से कम करना चाहिए । डायटिंग कर रहे लोगों को 2 दिन में एक केला खाने की सलाह दी जा सकती है ।

किडनी प्रॉब्‍लम  
ऐसे लोग जो किडनी की समस्‍या जैसे स्‍टोन या दूसरी किसी परेशानी से जूझ रहे हों उन्‍हें केले का

सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए । केले में मौजूद पोटैशियम किडनी पर एक्‍स्‍ट्रा प्रेशर डालते हैं जिससे किडनी की परेशानी बढ़ सकती है । किडनी प्रॉब्‍लम से जूझ रहे लोगों को केला बिलकुल नहीं खाना चाहिए ये उनके लिए बेहद पीड़ादायी और परेशानी भरा हो सकता है ।

पोटैशियम एलर्जिक
कुछ लोगों को केले से एलर्जी भी संभव है । केले में मौजूद पोटैशियम कई लोगों को सूट नहीं

करता । इसे खाने पर हाथों में या त्‍वचा के किसी भी हिस्‍से में खुजली महसूस हो तो समझिए ये आपको नुकसान पहुंचा रहा है । केले से होने वाली एलर्जी में सूजन, चकत्‍ते या रेडनेस भी हो सकती है, ऐसा कोई भी लक्षण दिखे तो सावधान हो जाएं ।

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स्वास्थ्य

प्रेग्‍नेंसी रोकने के 100 फीसदी नैचुरल तरीके, दवाईयां खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी

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गर्भनिरोधक दवाओं के कई साइड इफेक्‍ट्स सामने आते रहते हैं । ज्‍यादातर महिलाओं में हार्मोनल चेंजेस होने लगते हैं । वो मोटी भी हो जाती है । ऐसे में आगे कुछ उपाय बताए जा रहे हैं, जो पूरी तरह से प्राकृतिक हैं और असरदार भी ।

New Delhi, Sep 10: कॉन्‍ट्रासेप्टिव पिल्‍स के ऐसे कई नुकसान हैं जिनसे आप वाकिफ नहीं हैं, ऐसे में आपको कुछ अनजाने नुकसान उठाने पड़ सकते हैं । कई बार आप पीरीयड्स की प्रॉब्‍लम से गुजरती हैं, तो कई औरतों में तेज पेट दर्द उठता है । कई बार हार्मोन्‍स डिस्‍बैलेंस हो जाते हैं जिसके चलते तनाव होने लगता है, महिलाएं मोटी होने लगती हैं । ऐसे में क्‍या रास्‍ता अपनाया जाए, आप नैचुरल कॉन्‍ट्रासेप्टिव्‍स का इस्‍तेमाल कर सकती हैं । प्राकृतिक गर्भनिरोधन कोई चमत्‍कार नहीं है बल्कि वो फल या कुछ खाने-पीने की चीजें हैं जिन्‍हे गर्भ ठहरने के दौरान लेने की मनाही की जाती है । इनमें मौजूद तत्‍व गर्भ रुकने नहीं देते । हालांकि इन चीजों का सेवन करने से पहले ये जरूर जान लें कि इन चीजों से आप एलर्जिक तो नहीं ।

नीम
नीम को प्रजनन-विरोधी जड़ी-बूटी के रूप में जाना जाता है। महिलाएं इसे क्रीम या जेल के रूप में अपने प्राइवेट पार्ट पर लगा सकती हैं। इसके अलावा, पुरुष नीम के तेल के कैप्सूल का सेवन कर सकते है ।
दालचीनी – दालचीनी में मासिक धर्म के प्रवाह को उत्तेजित करने के गुण होते हैं। आपको कितनी मात्रा में दालचीनी का सेवन करना है, इसके बारे में डॉक्टर से सलाह ले लें।
पपीता खाएं
दादी, नानी या आपकी पड़ोसन से आपने जरूर सुना होगा कि गर्भवती होने के दौरान पपीते का

सेवन ठीक नहीं होता । इसे खाने से भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है । ऐसे में आप पपीते का सेवन रोज करें, गर्भधारण के चांसेज कम ही रहेंगे ।

अनानास यानी पाइन एप्‍पल
प्रेग्‍नेंसी में जो दूसरी चीज खाने से मना की जाती है वो है अनानास में कुछ ऐसे तत्‍व पाए जाते हैं जो

नैचुरल कॉन्‍ट्रासेप्टिव का काम करते हैं । इसके नियमित सेवन से मोटापा भी नहीं बढ़ता है । तो अगर आप अभी गर्भधारण नहीं करना चाहती तो खाने के साथ अनानास सैलेड खाने की आदत डाल लें । इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को दूध पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन कच्‍चा दूध उन्‍हें नुकसान पहुंचाता है । तो अगर आप गर्भवती नहीं होना चाहती तो सुबह – सुबह एक गिलास कच्‍चे दूध का गटक लें ।

अदरक
अनचाही प्रेग्नेंसी से बचने के लिए अदरक भी फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि अदरक से मासिक धर्म प्रेरित हो सकता है और ब्लीडिंग शुरू होने में मदद मिलती है। इसके लिए आप पानी में अदरक को घिसकर उबाल लें। उबालने के बाद पानी को छानकर पी लें
खुबानी –  खुबानी गर्भ में भ्रूण को विकसित होने से रोकती है। ऐसे में संभोग के बाद, पीरियड शुरू होने तक हर दिन 5 से 10 खुबानी खाएं।
सूखी अंजीर –  सूखी अंजीर भी गर्भनिरोधक का काम करती है। प्राचीन समय में इसका इस्तेमाल गर्भनिरोधक के लिए किया जाता था ।
विटामिन-सी
विटामिन-सी में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन को दबाने वाले गुण होते हैं। चूंकि, गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए प्रोजेस्ट्रोन जरूरी है, इसलिए यह बर्थ कंट्रोल का काम कर सकता है।
हींग – हींग को भी गर्भनिरोधक के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए हींग का सेवन

काढ़े के तौर पर किया जा सकता है। इसके सूखे एक्सट्रेक्ट को सफेद सरसों और सेंधा नमक के साथ मिलाकर बनाया जाता है। फिर इसमें सिरका मिलाकर पतला किया जाता है और फिर पिया जाता है !
कुट्टू
कुट्टू में रूटीन होता है, जिसका उपयोग गर्भावस्था को रोकने के लिए किया जाता है। आपको बता दें कि बाजार में रूटीन से तैयार की गई गोलियां भी मौजूद हैं, जिसका सेवन आप प्रेग्नेंसी रोकने के लिए कर सकते हैं। आपको इसकी कितनी मात्रा लेनी है, इस बारे में एक बार अपने डॉक्टर से पूछ लें।
सॉर्ड फिश – इस मछली में मरकरी पाया जाता है, ये प्राकृतिक गर्भनिरोधन का अच्‍छा तरीका है । संबंध बनाने के बाद जैसे आप आई पिल का सेवन करती हैं वैसे ही सॉर्ड फिश गर्भनिरोधन का काम करती है ।
(ये सभी उपाय इंटरनेट पर मौजूद जानकारी और रिसर्च पर आधारित है, इंडिया बियॉन्‍ड न्‍यूज इनकी पुष्टि नहीं करता)

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स्वास्थ्य

बॉडी को एक महीने पहले पता चल जाता है, हार्ट अटैक आने वाला है, कैसे आगे पढ़ें   

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दिल के दौरे से ठीक एक महीने पहले शरीर संकेत देना शुरू कर देता है । दिल का दौरा पड़ने से पहले शरीर को मिलने वाले संदेश क्‍या होते हैं ।

New Delhi, Aug 29: भारत में दिल के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, ज्‍यादातर केसेज में मरीज अस्‍पताल तक भी नहीं पहुंच पाते । दिल के रोगी दुनिया में नंबर एक बीमारी से ग्रसित हैं । बढ़ता प्रदूषण, लाइफस्‍टाइल, हमारा खानपान कई चीजें इसके लिए दोषी हैं । लेकिन करें क्‍या ये समझ नहीं आता । भारत में तो सेहत के प्रति लोगों की लापरवाही इस कदर है कि उन्‍हें सेहत की याद ही तब आती है जब हालत अस्‍पताल में भर्ती होने लायक हो जाती है । दिल के रोगियों को दौरे से पहले कुछ संकेत शरीर पहले से ही देना शुरू कर देता है । लेकिन इन संकेतों की अनदेखी ही हमें अस्‍पताल पहुंचा देती है ।

थकान रहना
अगर आप मामूली कामों में भी थकान महसूस कर रहे हैं । चलते – चलते हांफने लगते हैं । छोटी

मोटी महेनत के काम आपको पहाड़ जैसे भारी लगने लगे हैं तो अपने दिल की सेहत की जांच करवा लें । आपका दलि आपको संकेत दे रहा है कि उसमें कुछ तो गड़बड़ जरूर है ।
नींद गायब होना
अगर आप नींद से बार – बार जाग रहे हैं, नींद में आराम नहीं मिल रहा है , आपको बार – बार पेशाब जाना पड़ रहा है या फिर आप प्‍यास के लिए बार – बार उठ रहे हैं तो ये भी शरीर के संकेत हैं । अंदर कुछ गड़बड़ होने के । शरीर आपको बता रहा है कि उसे आराम नहीं है, और इलाज की जरूरत है ।

हांफते रहना
सांसों में असामान्‍यता, सांस ना आना, सांस लेने में दिक्‍कत होना, सांस फूलना ये सब दिल के किसी

ना किसी रोग की ओर इशारा करते हैं । अगर आपको बार – बार गहरी सांस लेने की जरूरत पड़ती है तो आपको अपनी ओर ध्‍यान देना चाहिए । ऐसा तभी होता है जब शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में ऑक्‍सीजन नहीं मिलती । अगर आपका डायजेस्टिव सिस्‍टम खराब है, बार – बार इनडाजेशन यानी अपच की समस्‍या हो रही है तो थोड़ा सावधान हो जाएं । ये संकेत भी दिल की परेशानी से जुड़े हो सकते हैं । ऐसे किसी भी हालात में बहुत जरूरी है आपका डॉक्‍टर से मिलना । ताकि समय पर

शरीर की जांच की जा सके । और अगर कुछ गड़बड़ हो रही है तो उसे समय रहते संभाला जा सके ।

रेगुलर चेकप्‍स जरूरी हैं
अगर आपको ब्‍लड प्रेशर, डायबिटीज या लंग्‍स से जुड़ी समस्‍या है तो आपको दिल के रोगों का

खतरा भी बढ़ जाता है । ऐसे लोग जिनके परिवार में कोई दिल का मरीज रहा है उसे अपना नियमित चेकअप कराते रहना चाहिए । दिल की बीमारी कई बार आनुवांशिक कारणों से भी हो सकती है । इसके अलावा सीडेंन्‍ट्री लाइफस्‍टाइल में जीने वाले लोग ये जान लें कि आप मौत की ओर ले जाने वाली लाइफस्‍टाइल को फॉलो कर रहे हैं । इस जीवनशैली में नियमित व्‍यायाम और बेहतर खानपान को शामिल कर हम कुछ हद तक बीमारियों से सावधान रह सकते हैं ।

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स्वास्थ्य

इस डाइट प्‍लान के आगे हर डायट है फेल, दुगना तेजी से वजन कम करने की गारंटी

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 शरीर के कमजोर मेटाबॉलिज्म के कारण कैलोरी जल्दी बर्न नहीं हो पाती हैं, जिस वजह से वजन कम होने की प्रक्रिया में बाधा आ जाती है । बोस्टोन चिल्ड्रन हॉस्पिटल की टीम के मुताबिक इस स्टडी से साफ है कि मोटापे को दूर करने में डाइट का कितना बड़ा रोल है ।

New Delhi, Aug 21: लाइफस्टाइल के चलते आजकल ज्‍यादातर लोग मोटापे से ग्रसित हैं । मोटापा बढ़ने की प्रक्रिया तो बड़ी आसानी से हो जाती है लेकिन इसे कम करना बेहद मुश्किल हो जाता है । लेकिन परेशान ना हों, इसे काबू में करना कोई मुश्किल काम नहीं । बस आपको सही डायट की जरूरत है । जी हां, डायट पर हुई शोध कहती है कि खाने पर ध्‍यान देकर आप अपने मोटापे को कम कर सकते हैं । बढ़ते वजन से परेशान होने की बजाय इससे निपटना सीखें । थेड़ी सी मेहनत और खास तरह के खाने के साथ अपने वजन को आप दुगनी रफ्तार से घटा सकते हैं ।

कम कार्ब वाली डायट
शोध के मुताबिक अब आप कम कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट को अपनी जीवनशैली का हिस्सा

बनाकर अपने वेट को बिना मेहनत किए ही कम कर सकेंगे । स्टडी की रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ते वजन से मुक्ति पाने के लिए कम कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट बेहद कारगर साबित होती है । स्टडी के दौरान रिसर्चर्स ने पाया कि जो लोग खाने में सलाद और लीन प्रोटीन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनमें भूख पैदा करने वाले हार्मोन कम प्रोड्यूस होते हैं और कम खाने की वजह से लोगों का वजन भी नियत्रंण में रहता है ।

18 से 65 उम्र वर्ग के लोगों पर हुआ शोध
इस स्टडी में 18 से 65 वर्ष के करीबन 234 लोग अधिक वजन वाले शामिल किए गए, जिनका बॉडी मास इंडेक्स  25 या उससे ज्‍यादा था । अध्‍ययन के दौरान इसमें शामिल लोगों ने शुरुआत में 10 हफ्तों तक वजन कम करने वाली डाइट को फॉलो किया । इस डाइट को फॉलो करने वाले लोगों में कम से कम 164 लोगों ने 10 फीसदी तक वजन कम किया ।
अलग-अलग डायट पर हुई रिसर्च
आपको बता दें कि इस स्टडी के दौरान लोगों को रेंडमली अलग-अलग डाइट फॉलो करने के लिए

कहा गया था । इसमें 20 हफ्तों तक कुछ लोगों ने 60 फीसदी कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट ली तो वहीं कुछ लोगों ने 40 फीसदी और 20 फीसदी वाली कार्बोहाइड्रेट डाइट ली । इस रिसर्च में शामिल सभी लोगों को टीम की ओर से तैयार किया गया खाना प्रोवाइड कराया गया, जिसमें प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट शामिल था । इसके बाद ये जानने की कोशिश हुई कि किस ग्रुप के लोगों ने सबसे ज्‍यादा वजन कम किया है ।

कार्ब डायट वालों ने वजन किया कम
नतीजे सामने आए तो सब हैरान रह गए । सबसे कम कार्बोहाइड्रट वाली डाइट फॉलो करने वाले

लोगों का दूसरे लोगों के मुकाबले ज्‍यादा वजन कम हुआ । शोधकर्ताओं ने लोगों के इंस्युलिन हार्मोन की भी जांच की । इंस्युलिन हार्मोन ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ने से रोकता है । नतीजों में ये भी पाया गया कि स्टडी की शुरुआत में जिन लोगों में इंसुलिन की मात्रा अधिक थी उनका वजन भी कम कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट लेने वाले लोगों से भी ज्यादा कम हुआ ।

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