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शहीद होने से पहले सचिन ने कहा था-मां इस बार मेरा इंतजार न करना-दुश्मन को कुचलना है

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New Delhi : 19 साल की उम्र में देश के लिए शहीद हुए सचिन शर्मा की मां को क्या पता था कि एक दिन पहले जिस बेटे का कुशलक्षेम पूछ रही है, अगले ही दिन उसकी शहादत की खबर आ जाएगी। सचिन शर्मा ने शहादत से एक दिन पहले घर पर फोन किया था। मां सावित्री से बात हुई थी तो कहता कि मां, इस बार जल्दी नहीं आ पाऊंगा। सरहद पर तनाव बढ़ रहा है। दुश्मन ने दुस्साहस किया तो कुचलकर ही आऊंगा। मां बोली- कितना दुबला हो गया है, कुछ खा पी लिया कर तो बोला कि मां दुश्मन के लिए मैं दुबला ही बहुत हूं। इसके बाद अगले ही दिन वो देश के लिए शहीद हो गया।

जाट रेजीमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल कमल सिंह ने बताया कि सचिन की खेलों में रुचि थी। वह राजपुताना राइफल बटालियन की कबड्डी टीम का प्रमुख खिलाड़ी था और स्टार रेडर भी था। कई बार उसको सेना के अधिकारियों ने खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन पर सम्मानित भी किया था। सचिन शर्मा हर वक्त चुस्त रहता था और ड्यूटी के प्रति पूरी तरह ईमानदार। उन्होंने कभी उसे ड्यूटी से जी चुराते नहीं देखा।सचिन को पिता सुरेंद्र कुमार शर्मा बार बार शादी करने को कह रहे थे, लेकिन एक ही जवाब मिलता था कि पहले छोटी बहन अंजू व भाई साहिल को पढ़ा लिखा दूं अगर अब शादी करवा ली और मैं शहीद हो गया तो आप पर बहू की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। सचिन अपने इरादे पूरे करने से पहले ही जनवरी 2018 में अरुणाचल प्रदेश में दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गया।

13 दिसंबर 2016 को यूपी में सचिन ने ट्रेनिंग शुरू की थी। अक्टूबर में ट्रेनिंग पूरी कर 15 दिन की छुट्टी घर आया था। नवंबर में पहली पोस्टिंग अरुणाचल प्रदेश के तवांग में हुई थी। 5 फरवरी को उसकी 15 दिन की छुट्टी भी मंजूर हो गई थी। सचिन तीन चार दिन में घर पर फोन कर बात करता था। बीत दिनों छुट्टी आए सचिन ने घर खर्च चलाने के लिए अपना एटीएम कार्ड पिता को दे दिया था। उसने कहा था कि उसकी ऐसी जगह पर ड्यूटी है जहां पैसों की जरूरत नहीं पड़ती। एक दौर वो था जब स्पोर्ट्स जूते खरीदने को पैसे नहीं थे, यमुना नदी में नंगे पैर दौड़ता था।

मोहित और सोनू ने बताया कि उनका दोस्त सचिन शर्मा बचपन से ही मेहनती थे। उनका सपना फौजी बनने का था। उसने अपना सपना पूरा करने के लिए दौड़ की प्रैक्टिस के लिए उसके पास जूते तक नहीं थे। उन्होंने जूते खरीदवाने की बात कही तो उसने इनकार कर दिया। वह सड़क की बजाय यमुना नदी के अंदर रेतीली भूमि में दौड़ा और रेस की प्रैक्टिस की। वह मेहनत कर दो साल में ही सेना में भर्ती हो गया।

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बचपन से अंधा था तो लोग बुलाते थे जोकर, ऑडियो सुन-सुनकर की पढ़ाई और बन गया IAS ऑफिसर

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New Delhi : दुनिया में ज्यादातर दिव्यांग लोगों का हर पल मजाक बनाया जाता है, लोग उन्हें उनकी स्थिति या शरीर की कमियों को देखकर जोकर समझते हैं। ऐसे ही एक नेत्रहीन IAS ऑफिसर हैं, जिन्हें लोग जोकर समझते थे। ‘भारत की कुल आबादी के 2 प्रतिशत लोग दिव्यांग है। ये दिव्यांग ऐसे हैं जो हर पल अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं और हर दिन जीत हासिल भी कर रहे हैं। ऐसे ही एक IAS हैं Kempahonnaiah..इनका जन्म कर्नाटक में हुआ था। ये आज उन लोगों के लिए मिसाल हैं जो खुद को कमजोर समझते हैं।

सिविल सर्विस की परीक्षा में 340वी रैंक मिली थी। ये 2017 बैच के IAS ऑफिसर हैं। ये देख नहीं सकते हैं, लेकिन फिर भी इस मुकाम पर हैं। इस एग्जाम को पास करने के लिए इनकी पत्नी ने भी इनका बहुत साथ दिया था। नेत्रहीन होने के कारण वह आसानी से पढा़ई नहीं कर सकते थे इसलिए उनकी पत्नी ने उनके लिए ऑडियो नोट्स बनाये जिससे वह सुन-सुनकर पढ़े सके। जैसा पत्नी ने सोचा था ठीक वैसा ही हुआ। ऑडियो सुन-सुनकर इन्होंने पढ़ाई की और इस मुकाम पर पहुंच गए कि IAS बन गए।

उन्होंने कहा कि दिव्यांग कम्युनिटी से जुडे़ होने पर मुझे बहुत गर्व है। मैं बहुत खुश हूं कि मैं इस कम्युनिटी का हिस्सा हूं। मैंने हमेशा यह माना है कि ‘हैंडीकैप’ शब्द दो पोजिटिव शब्दों से बना है। इसमें वर्ड हैंडी और कैप एक दूसरे का हमेशा साथ देते हैं। किसी इंसान के लिए कैप एक तरह से धूप से बचाने के लिए एक छांव की तरह काम करता है। ‘मैंने 3rd क्लास में अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। एक गर्वमेंट ब्लाइंड स्कूल से पढा़ई की। मैंने अपने पूरे जीवन में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में ही पढाई की है।

उनके बड़े भाई सी एच नानजप्पा भी दिव्यांग हैं। उन्होंने कहा पोस्टिंग होने से पहले कहा था कि मैं हर हाल में विकलांगों की मदद करूंगा। उन्हें हर तरह की सुविधाएं दूंगा। उन्होंने बताया जब मैं पढा़ई कर रहा था तो देख न पाने के कारण मैं कभी भी कपडे़ परफेक्ट तरीके से नहीं पहन पाता था, न ही अपने काम को सही तरह से कर सकता था। यह सब देखकर लोग मेरा मजाक बनाया करते थे और मुझे एक जोकर भी समझते थे। मैं दिव्यांगों की स्थिति को ठीक करने की कोशिश हमेशा करता रहूंगा। मैं नहीं चाहता जिस स्थिति से मैं गुजरा हूं उस स्थिति का सामना कोई और भी करे।

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पिता ने पूरी की बेटी की इच्छा…हेलीकॉप्टर से करवाई बेटी की विदाई

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New Delhi : राजस्थान में झुंझुनू के अजितपुरा गांव में एक व्यक्ति ने अपनी बेटी रीना को शादी के बाद हेलीकॉप्टर से विदा किया। रीना का विदाई देखने के लिए आसपास के लोगों का तांता लग गया।

दुल्हन के पिता महेंद्र सोलख के मुताबिक, मैंने एक साल पहले बेटी को हेलीकॉप्टर से विदा करने योजना बनाई थी। शादी के दो साल पहले अपने परिवार से यह विचार साझा किया था। इस विदाई की खूूब चर्चा हो रही है। बताया जाता है कि इस शादी में खूब खर्चा हुआ है।

वहीं, राजस्थान में अलवर जिले के मलावली गांव निवासी वरिष्ठ शिक्षक रमेशचंद्र मीणा सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद अपनी पत्‍‌नी की इच्छा पूरी करने के लिए हेलीकॉप्टर से गांव पहुंचे थे। मीणा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सोराई से सेवानिवृत्ति हुए थे।

इस मौके पर मीणा और उनकी पत्‍‌नी को स्कूल में कार्यक्रम आयोजित कर छात्रों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने विदाई दी। मीणा विदाई समारोह के बाद अपनी पत्‍‌नी के साथ हेलीकॉप्टर में सवार हुए और 22 किलोमीटर दूर अपने गांव मलावली पहुंचे। इस दौरान गांव में जबर्दस्त भीड़ उमड़ी। अपने गांव में हेलीकॉप्टर देखकर ग्रामीण बेहद रोमांचित हो रहे थे

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पिता ने पूरा की बेटी की इच्छा…हेलीकॉप्टर से करवाई बेटी की विदाई

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New Delhi : राजस्थान में झुंझुनू के अजितपुरा गांव में एक व्यक्ति ने अपनी बेटी रीना को शादी के बाद हेलीकॉप्टर से विदा किया। रीना का विदाई देखने के लिए आसपास के लोगों का तांता लग गया।

दुल्हन के पिता महेंद्र सोलख के मुताबिक, मैंने एक साल पहले बेटी को हेलीकॉप्टर से विदा करने योजना बनाई थी। शादी के दो साल पहले अपने परिवार से यह विचार साझा किया था। इस विदाई की खूूब चर्चा हो रही है। बताया जाता है कि इस शादी में खूब खर्चा हुआ है।

वहीं, राजस्थान में अलवर जिले के मलावली गांव निवासी वरिष्ठ शिक्षक रमेशचंद्र मीणा सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद अपनी पत्‍‌नी की इच्छा पूरी करने के लिए हेलीकॉप्टर से गांव पहुंचे थे। मीणा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सोराई से सेवानिवृत्ति हुए थे।

इस मौके पर मीणा और उनकी पत्‍‌नी को स्कूल में कार्यक्रम आयोजित कर छात्रों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने विदाई दी। मीणा विदाई समारोह के बाद अपनी पत्‍‌नी के साथ हेलीकॉप्टर में सवार हुए और 22 किलोमीटर दूर अपने गांव मलावली पहुंचे। इस दौरान गांव में जबर्दस्त भीड़ उमड़ी। अपने गांव में हेलीकॉप्टर देखकर ग्रामीण बेहद रोमांचित हो रहे थे

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