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आतंक के खिलाफ कड़े कानून से क्यों डर रही कांग्रेस,देश के गद्दारों को हम तो नहीं छोड़ेंगे: शाह

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New Delhi : राज्यसभा में आज विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) (UAPA) संशोधन विधेयक को पारित कर दिया गया। बिल के पक्ष में 147 और विपक्ष में 42 वोट पड़े। इस बिल में आ’तंक से संबंध होने पर संगठन के अलावा किसी शख्स को भी आ’तंकी घोषित करने का प्रावधान शामिल है।

अमित शाह ने कि जब तक व्यक्ति को आतंकी घोषित नहीं करते इनके काम पर आ’तंकी गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाई जा सकते। उन्होंने कहा कि अमेरिका, पाकिस्तान, चीन, इजरायल में व्यक्ति को आ’तंकी घोषित करने का कानून पहले से ही, हम तो कानून लाने में लेट हो गए। कांग्रेस के लोग कानून के दुरुपयोग की बात न करें क्योंकि उनका इतिहास तो काफी लंबा है और इस पर 7 तारीख तक बोल सकता हूं। कांग्रेस इस कानून से क्यों डर रही है। आपातकाल की याद नहीं दिलाना चाहता जब लोगों के सारे अधिकार छीन लिए गए थे। तब देश पर नहीं प्रधानमंत्री की कुर्सी पर खतरा था।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा दिग्विजय सिंह का गुस्सा जायज है वह अभी-अभी चुनाव हारकर आए हैं। उन्होंने कहा कि NIA के 3 केसों पर सजा न होने पर दिग्विजय सिंह को आपत्ति है, इन मामलों में इसलिए सजा नहीं हुई कोई यह केस ही राजनीतिक बदले की भावना से लगाए गए थे, जिसमें निर्दोष लोगों को फंसाया गया था। समझौती एक्सप्रेस ध’माकों में असली दोषियों को छोड़ा और बेकसूर लोगों को पकड़ा गया। उनके खिलाफ कोई सबूत NIA नहीं दे पाई और तब भी कांग्रेस के ही सरकार थी। इन मामलों में आतंकवाद को धर्म से जोड़ा गया और राजनीतिक एजेंडा साधा गया। मक्का मस्जिद धमाकों में भी चार्जशीट कांग्रेस के वक्त ही हुई

 

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तानाजी…वो महान योद्धा जिसने मुगलों को घुटनों पर ला दिया

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New Delhi : अजय देवगन की अपकमिंग फिल्म ‘तानाजी द अनसंग वॉरियर’ का नया ट्रेलर रिलीज हो गया है। इसमें वह ख’तरनाक और गुस्से भरे लुक में नजर आ रहे हैं। फिल्म 10 जनवरी 2020 को रिलीज होगी लेकिन उससे पहले चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है।

लोगों के मन में सवाल भी उठने लगे हैं कि आखिर कौन हैं तानाजी मालुसरे जिनके नाम पर फिल्म बनाई जा रही है और अजय देवगन मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। लोगों के मन में सवाल भी उठने लगे हैं कि आखिर कौन हैं तानाजी मालुसरे जिनके नाम पर फिल्म बनाई जा रही है और अजय देवगन मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।

आज हम आपके इस सवाल का जवाब बताते हैं। तानाजी, छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापति थे। उनकी वीरता की कहानियां काफी प्रचलित थी। उनकी वीरता को देखते हुए शिवाजी उन्हें ‘सिंह’ ही कहा करते थे। 1670 ईस्वी में कोण्डाणा किले (सिंहगढ़) को जीतने में तानाजी ने वीरगति पाई थी। जब शिवाजी सिंहगढ़ को जीतने के लिए निकले थे उस समय तानाजी अपने किसी खास घरेलू कार्यक्रम में जुटे हुए थे। जैसे ही उन्हें शिवाजी महाराज का समाचार मिला वह घर से निकलकर यु’द्ध के लिए रवाना हो गए।

तानाजी मालुसरे शिवाजी महाराज के घनिष्ठ मित्र और वीर निष्ठावान व्यक्ति थे। सेना लेकर तानाजी शिवाजी के पास पुणे की ओर चल दिए। उनके साथ उनका भाई तथा अस्सी वर्षीय शेलार मामा भी थे। पुणे में शिवाजी ने तानाजी से सलाह मशविरा किया और अपनी सेना उनके साथ कर दी।

कोण्डाणा दुर्ग पर तानाजी के नेतृत्व में जवानों ने रात में आक्रमण कर दिया। तानाजी के पास एक गोह थी, जिसका नाम यशवंती था। इसी के सहारे वह किले की दीवार फांदकर मुख्य दरवाजा खोलते थे। कोण्डाणा में भीषण यु’द्ध हुआ। दुर्गपाल उदयभानु नाम के साथ लड़ते हुए तानाजी वीरगति को प्राप्त हुए।

कुछ ही देर में बाद शेलार मामा के हाथों उदयभानु भी मा’रा गया। सुबह का सूरज निकलते निकलते कोण्डाणा दुर्ग पर भगवा ध्वज फहर गया।

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रूस ने कहा-साल 2025 तक भारत को S-400 ट्रायम्फ बनाकर दे देंगे

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New Delhi : रूस ने भारत के द्वारा खरीदी गई S-400 ट्रायम्फ एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल डिफेंस सिस्टम बनाने का काम शुरु कर दिया है।

संयुक्त अरब अमीरात के दुबई (Dubai) शहर में आयोजित ‘दुबई एयर शो 2019’ में S-400 ट्रायम्फ एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल डिफेंस सिस्टम बनाने वाली कंपनी ‘रोसटेक’ के हेड ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हम साल 2025 तक भारत को S-400 ट्रायम्फ एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल डिफेंस सिस्टम बनाकर भारत को दे देंगे।

S-400 ट्रायम्फ को बनाने का काम हमारी कंपनी ने शुरु कर दिया है। इस डिफेंस सिस्टम को खरीदने के लिए भारत पहले ही एडवांस में पेमेंट कर चुका है। मैं आपको कोई सटीक आंकड़ा तो नहीं बता सकता लेकिन हां एडवांस पेमेंट हो चुकी है। मिसाइल बनाने का काम लगातार चल रहा है। S-400 ट्रायम्फ बनाने का काम समझौते की तय समय सीमा साल 2025 तक पूरा हो जाएगा।

आपको बता दें कि S-400 ट्रायम्फ को अमेरिका के एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल डिफेंस सिस्टम ‘थाड’ से भी मजबूत माना जाता है। भारत ने पिछले साल अक्टूबर में S-400 ट्रायम्फ एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए रूस के साथ 40 हजार करोड़ रुपये की डील की थी। भारत रूस से पांच S-400 ट्रायम्फ खरीद रहा है। रूस से S-400 ट्रायम्फ मिलने के बाद भारत की शक्ति कई गुना तक बढ़ जाएगी। S-400 ट्रायम्फ भारत के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। S-400 ट्रायम्फ बिल्कुल एक बूस्टर शॉट की तरह काम करता है। आप बस ये समझ लीजिए कि अगर भारत पर किसी भी देश से लड़ाकू विमान, ड्रोन या मिसाइल से हमला होता है तो S-400 ट्रायम्फ पलक झपकते ही उसको हवा में ही धराशाई कर देगा।

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सियाचिन : -30 डिग्री में देश की सुरक्षा में डटे रहते हैं सेना के जवान-सलाम है इनकी हिम्मत को

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New Delhi: सियाचिन, यहां माइनस 30 डिग्री टेम्परेचर में भी भारतीय सेना देश की सुरक्षा में डटी रहती है। पहाड़ों की ऊंचाई हो या फिर बर्फ की आंधी, थरीला रास्ता हो या फिर कोई तूफान, हर वक्त भारतीय सेना दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देती है।

भारतीय सेना मुश्किलों में सरहद की सुरक्षा के लिए मशहूर है। हमारे जवान कई इंटरनेशनल बॉर्डर भारी ठंड और बर्फबारी के बीच माइनस 30 डिग्री से ज्यादा टेम्परेचर में भी मुस्तैद रहते हैं।
सियाचिन में एक बार तापमान माइनस 60 डिग्री तक चला गया था, बावजूद भारतीय सेना के जवान वहां ड्यूटी करते रहे। यह पूर्वी काराकोरम रेंज में 5,753 मीटर की ऊंचाई पर जबकि, समुंद्र तल से 18 हजार 875 फीट की ऊंचाई पर है। यहां सर्दियों में औसत बर्फबारी 1000 सेमी से अधिक है और तापमान करीब माइनस 50 डिग्री तक चला जाता है।

यहां आर्मी के बेस कैंप तक पहुंचने का रास्ता लेह से शुरू होता है। ये रास्ता आसान नहीं है। लेह से सियाचिन बेस कैंप का रास्ता 230 किलोमीटर लंबा है, जो कि दुनिया के सबसे ऊंचे सड़क मार्ग खारदुंगला से होकर गुजरता है। सियाचिन की 45 से ज्यादा ऊंची चोटियों की निगरानी भारतीय सेना करती है। यहां ऑक्सीजन की भारी कमी होती है। फिर भी बर्फीले और जानलेवा हालात में सेना यहां मुस्तैदी से तैनात रहती है।

यह भारत के सबसे ठंडे इलाकों में से है और सर्दियों में यहां तापमान माइनस 45 डिग्री तक गिर जाता है। यहां माइनस 60 डिग्री तक तापमान मापा जा चुका है। जम्मू-कश्मीर का उड़ी सेक्टर बर्फबारी के लिए मशहूर यहां जीरो डिग्री से कम तापमान (जो माइनस 20 डिग्री तक जा सकता है) में सेना के जवान बॉर्डर की सुरक्षा करते हैं। बर्फबारी के दौरान यहां पहुंचना एक मुश्किल चुनौती है। अगर बर्फबारी के कारण रास्ते बंद हों तो यहां पहुंचने में आपको महीने भर भी लग सकते हैं।

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