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अभी-अभी : कमलेश हत्याकांड में DGP का खुलासा, राशिद पठान ने रची हत्या की साजिश

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New Delhi : कल लखनऊ में हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी हत्याकांड पर UP पुलिस के DGP ने बड़ा खुलासा किया है। DGP ओपी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि हत्या के तीनों आरोपी गुजरात के सूरत के रहने वाले हैं। राशिद पठान ने हत्या की साजिश रची है। उन्होंने कहा कि मिठाई का डिब्बा अहम सुराग बना जिससे हम आरोपियों तक पहुंचे।

सपा का हमला : समाजवादी पार्टी ने लखनऊ में कमलेश तिवारी की हत्या पर सीएम योगी आदित्यनाथ से जवाब मांगा है। समाजवादी पार्टी ने ट्वीट कर लिखा है, “सिपाही आपका, SO आपका, CO आपका, SP आपका, SSP आपका, DIG आपका, IG आपका, DGP आपका, फिर भी प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दिनदहाड़े कमलेश तिवारी की हत्या। मुख्यमंत्री जवाब दें।” इस बीच यूपी पुलिस के कमिश्नर मुकेश मेश्राम और आईजी एसके भगत भी महमूदाबाद पहुंच गए हैं। महमूदाबाद में कमलेश तिवारी का अंतिम संस्कार किया जाना है, लेकिन कमलेश तिवारी के परिवार वाले सीएम को बुलाने की मांग कर रहे हैं और अंतिम संस्कार नहीं कर रहे हैं।

हत्यारोपियों की पहचान हुई : कमलेश तिवारी हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। कमलेश तिवारी हत्याकांड को अंजाम देने वाले दो लोगों के नाम का खुलासा हो गया है। इसमें से एक शख्स का नाम फरीदुद्दीन पठान उर्फ मुईनुद्दीन शेख है। जबकि दूसरे शख्स का नाम अशफाक शेख है। हत्या के सीसीटीवी फुटेज में जो दो लोग दिख रहे हैं ये वही हैं। इन्हीं ने सूरत में मिठाई और चाकू खरीदा था और हत्या को अंजाम देने के लिए यूपी गए थे।

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देश की रक्षा करते हुए श’हीद हुए संतोष..अंतिम यात्रा में लगे भारत माता की जय के नारे

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New Delhi : भारत माता का एक और लाल रविवार को जम्मू में आइईडी ध’माके में श’हीद हो गया। सोमवार शाम को तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह पहुंचते ही दर्शन की होड़ मच गई।

परिवार ही नहीं, पूरे गांव को अपने लाल के हमेशा के लिए बिछुड़ जाने का ग’म तो था मगर देश की हिफाजत में शहादत पर गर्व भी था। शवयात्रा के बाद जब पुत्र अभय ने मुखाग्नि दी तो संतोष सिंह अमर रहें, भारत माता की जय के नारे गूंजते रहे।

रविवार को जम्मू-कश्मीर, अखनूर के प्लांवाला सेक्टर में नियंत्रण रेखा के करीब हुए आ’इईडी ध’माके में सैनिक संतोष सिंह भदौरिया श’ही’द हो गए थे। सेना की फोर आरआर रेजीमेंट के जवान श’हीद की पार्थिव देह लेकर सोमवार शाम गांव लेकर पहुंचे।

तिरंगे में लिपटा ताबूत देख श’हीद की पत्नी विमला देवी बेहोश हो गई। दोनों पुत्रियां दीक्षा व प्रिया और पुत्र अभय भी फू’ट-फू’टकर रोने लगे। उनके दोनों बड़े भाई लालजी और दिनेश सिंह को लोगों ने ढांढस बंधाया। लाल की शहादत और स्वजनों के क्रंदन से पूरा गांव गमगीन हो गया था। श’हीद को श्रद्धांजलि देने आए आसपास के तमाम गांवों के लोग क्षेत्र के हजारों लोगों की आंखें नम थीं।

घर से श’हीद की पार्थिव देह को सेना की गाड़ी पर रखकर शवयात्रा शुरू हुई। गांव की गलियों से होती हुई श’वयात्रा गांव के बाहर पहुंची जहां पैतृक जमीन पर चिता सजाई गई थी। यहां सैन्य सम्मान के साथ श’हीद संतोष को अंतिम सलामी दी गई। इसके बाद इकलौते पुत्र अभय सिंह ने मुखाग्नि दी।

संतोष की पार्थिव देह को लेकर आए नायक दिलीप सिंह और सूबेदार वीरेंद्र सिंह 17 वर्षो से एक ही यूनिट में थे। दोनों साथियों ने भावुक होते हुए बताया कि संतोष सिंह सरल स्वभाव के थे। वे हमेशा अपने साथियों का हौसला बढ़ाते। कहते थे कि देश की रक्षा सबसे ऊपर है। बच्चों को पढ़ा कर काबिल बनाना है।

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प्रदर्शन करने वाले JNU छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

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New Delhi : दिल्ली की जवाहर लाल यूनिवर्सिटी में हॉस्टल फीस बढ़ोतरी को लेकर जारी प्रदर्शन अभी थमा नहीं है। सोमवार को एक तरफ जहां संसद के शीतकालीन सत्र का पहला दिन था, दूसरी ओर बाहर सड़कों पर JNU के छात्र प्रदर्शन कर रहे थे।

इस दौरान दिल्ली पुलिस के साथ छात्रों की झड़प हुई, कई छात्र घायल भी हुए। अब इसी मामले में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

JNU छात्रों के द्वारा सोमवार को किए गए प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है। सोमवार को धारा 144 होने के बावजूद सैकड़ों की संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे थे। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसमें कई छात्र घायल भी हो गए थे। कानून का उल्लंघन करने के आरोप में किशनगढ़ थाने में ये मुकदमा दर्ज किया गया है।

बता दें कि छात्रों के प्रदर्शन के बाद जेएनयू प्रशासन द्वारा बीपीएल कार्ड धारकों के लिए फीस में 50 प्रतिशत की कमी की गई थी। सूत्रों के मुताबिक अकेले रहने वाले कमरे का किराया, जिसे 20 रुपये से बढ़ा कर 600 रुपये प्रति माह कर दिया गया था, वह अब 200 रुपये होगा। इसी तरह, दो छात्रों के रहने वाले कमरे का किराया जिसे 10 रुपये से बढ़ा कर 300 रुपये प्रति माह किया गया था, वह अब 100 रुपये होगा।

इस पर छात्रों का कहना था कि ये कोई ऑनलाइन सेल नहीं है कि कुछ प्रतिशत की फीस में छूट दी जाएगी। छात्रों की मांग है कि इस फीस वृद्धि के फैसले को पूरी तरह से वापस लेना चाहिेए। जब तक उनकी ये मांग नहीं मानी जाएगी तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। वहीं छात्रों को शांत करने और इस मसले को सुलझाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD) ने यूजीसी (UGC) के पूर्व चेयरमैन वीएस चौहान की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की है। यह कमेटी विद्यार्थियों और प्रशासन से बात करके कोई हल निकालेगी। वहीं इससे पहले जेएनयू के वीसी ने भी शिक्षकों को पत्र लिख उनसे छात्रों को समझाने और जेएनयू में शांति बहाली की अपील की थी।

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इजरायल को बड़ी सफलता…अमेरिका ने वेस्ट बैंक में इजराइल के कब्जे को मान्यता दी

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New Delhi : इजराइल के प्रति अपनी नीतियों में अमेरिका ने बड़ा बदलाव किया है। ट्रम्प प्रशासन ने इजराइल के वेस्ट बैंक और पूर्व येरुशलम पर कब्जे को मान्यता दी है। रक्षा मंत्री माइक पोम्पियो ने सोमवार को कहा कि अमेरिका अब वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के तौर पर नहीं देखता।

पोम्पियो ने कहा कि वेस्ट बैंक हमेशा से इजराइल और फिलिस्तीन के बीच विवाद का कारण रहा है। इन बस्तियों को बार-बार अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कहने का कोई फायदा नहीं हुआ। इसकी वजह से शांति की कोशिशें भी नहीं हुई हैं।

इजराइल ने अमेरिका के इस फैसले का स्वागत किया है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू ने कहा कि यह ऐतिहासिक गलती को सही करने जैसा है। उन्होंने अन्य देशों से भी इस फैसले को मानने के लिए कहा। हालांकि, फिलिस्तीन की तरफ से वेस्ट बैंक के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे साएब एरेकत ने कहा, अमेरिका का फैसला वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और शांति के लिए खतरा है। इस तरह का फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून को जंगल के कानून से बदलने जैसा है।

वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों का विवाद इजराइल और फिलिस्तीन के बीच विवाद का सबसे बड़ा कारण है। 1967 के तीसरे अरब-इजराइल युद्ध में इजराइल ने अपने तीन पड़ोसी देशों सीरिया, मिस्र और जॉर्डन को हराया था।

इसके बाद उसने वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुशलम के बड़े हिस्से पर कब्जा कर 140 बस्तियां बना दी थीं। यहां अभी करीब 6 लाख यहूदी रहते हैं। इन बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध करार दिया जाता है, हालांकि इजराइल ने इन्हें अपना हिस्सा मानता है।

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