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DM के एक साइन के लिए जिस पिता ने खाईं थी ठोंकरे..आज कलेक्टर बन गई है उस पिता की बेटी

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New Delhi : कहते है कि कुछ करने का जूनून हो तो हर राह आसान हो जाती है। इरादों में दम होनी चाहिए फिर आपकी कमजोरी भी आपकी ताकत बन जाती है और आपके हौंसलों के आगे हर मुशिकल राह हो जाती है।

इंसान के इरादे और हौसलें ही उसकी ताकत होती है। अगर दुनिया से अलग करने की इच्छा है तो फिर आपको सपने खुली आँखों से देखने की जरूरत है और इसके बाद होता क्या है कि आपकी कमजोरी भी आपके इरादों के सामने अपने घुटने टेक देती है।

सिर्फ आपकों अपने सपने को एक दिशा देने की जरूत है और बड़ी से बड़ी कामयाबी भी फिर आपको आसानी से मिल जाएँगी। और इस बात को सबित किया है
महाराष्ट्र की रोहिणी भाजीभाकरे ने जिसने नौ साल की उम्र में अपनी पिता की परेशानी देखकर ठाना था की अब किसी का पिता इस परेशानी ने नहीं गुजरना पड़ेगा और आज वह लड़की IAS ऑफिसर बन गई है ।

दरअसल कई साल पहले महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में रोहिणी भाजीभाकरे के पिता को जिला कलेक्टर के कुछ सरकारी घोषणा के दस्तावेजों पर दस्तखत लेने के लिए काफी परेशानियों का समाना करना पड़ा था और उसी वक्त अपने पिता की परेशानी को देखकर रोहिणी ने कलेक्टर बनने की प्रतिज्ञा ले ली थी।

आज नौ साल की उम्र में पिता से किया गया वादा महाराष्ट्र की रोहिणी भाजीभाकरे ने 23 साल बाद IAS अधिकारी बनकर पूरा किया है और आज तमिलनाडु के सलेम जिले की पहली महिला कलेक्टर बन गई। इतना ही नही कलेक्टर रोहिणी की प्रशासनिक कार्यों की प्रशंसा आज पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है है।

पुरानी बातों को याद कर रोहणी बताती हैं कि ‘मेरे पिताजी की कठिनाई को देखते हुए मैं एक सरकारी नौकर बनने और सार्वजनिक सेवा पर ध्यान देने के लिए प्रेरित हुई। इतना ही नही उन्होंने बताया कि जब मैंने उन्हें बताया कि मैं कलक्टर बनना चाहती हूं तो उन्होंने बोला कि मेरी सलाह है कि तुम जब एक कलक्टर बन जाओ तो यह सुनिश्चित करना कि तुम हमेशा लोगों को पहले रखो। वही वजह है कि रोहणी आज सरकारी नौकर बन गई है। इतना ही नही आज वह स्वच्छता और स्वास्थ्य जैसे समस्यों से लोगों को अवगत करा रही है।

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बचपन से अंधा था तो लोग बुलाते थे जोकर, ऑडियो सुन-सुनकर की पढ़ाई और बन गया IAS ऑफिसर

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New Delhi : दुनिया में ज्यादातर दिव्यांग लोगों का हर पल मजाक बनाया जाता है, लोग उन्हें उनकी स्थिति या शरीर की कमियों को देखकर जोकर समझते हैं। ऐसे ही एक नेत्रहीन IAS ऑफिसर हैं, जिन्हें लोग जोकर समझते थे। ‘भारत की कुल आबादी के 2 प्रतिशत लोग दिव्यांग है। ये दिव्यांग ऐसे हैं जो हर पल अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं और हर दिन जीत हासिल भी कर रहे हैं। ऐसे ही एक IAS हैं Kempahonnaiah..इनका जन्म कर्नाटक में हुआ था। ये आज उन लोगों के लिए मिसाल हैं जो खुद को कमजोर समझते हैं।

सिविल सर्विस की परीक्षा में 340वी रैंक मिली थी। ये 2017 बैच के IAS ऑफिसर हैं। ये देख नहीं सकते हैं, लेकिन फिर भी इस मुकाम पर हैं। इस एग्जाम को पास करने के लिए इनकी पत्नी ने भी इनका बहुत साथ दिया था। नेत्रहीन होने के कारण वह आसानी से पढा़ई नहीं कर सकते थे इसलिए उनकी पत्नी ने उनके लिए ऑडियो नोट्स बनाये जिससे वह सुन-सुनकर पढ़े सके। जैसा पत्नी ने सोचा था ठीक वैसा ही हुआ। ऑडियो सुन-सुनकर इन्होंने पढ़ाई की और इस मुकाम पर पहुंच गए कि IAS बन गए।

उन्होंने कहा कि दिव्यांग कम्युनिटी से जुडे़ होने पर मुझे बहुत गर्व है। मैं बहुत खुश हूं कि मैं इस कम्युनिटी का हिस्सा हूं। मैंने हमेशा यह माना है कि ‘हैंडीकैप’ शब्द दो पोजिटिव शब्दों से बना है। इसमें वर्ड हैंडी और कैप एक दूसरे का हमेशा साथ देते हैं। किसी इंसान के लिए कैप एक तरह से धूप से बचाने के लिए एक छांव की तरह काम करता है। ‘मैंने 3rd क्लास में अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। एक गर्वमेंट ब्लाइंड स्कूल से पढा़ई की। मैंने अपने पूरे जीवन में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में ही पढाई की है।

उनके बड़े भाई सी एच नानजप्पा भी दिव्यांग हैं। उन्होंने कहा पोस्टिंग होने से पहले कहा था कि मैं हर हाल में विकलांगों की मदद करूंगा। उन्हें हर तरह की सुविधाएं दूंगा। उन्होंने बताया जब मैं पढा़ई कर रहा था तो देख न पाने के कारण मैं कभी भी कपडे़ परफेक्ट तरीके से नहीं पहन पाता था, न ही अपने काम को सही तरह से कर सकता था। यह सब देखकर लोग मेरा मजाक बनाया करते थे और मुझे एक जोकर भी समझते थे। मैं दिव्यांगों की स्थिति को ठीक करने की कोशिश हमेशा करता रहूंगा। मैं नहीं चाहता जिस स्थिति से मैं गुजरा हूं उस स्थिति का सामना कोई और भी करे।

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पिता ने पूरी की बेटी की इच्छा…हेलीकॉप्टर से करवाई बेटी की विदाई

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New Delhi : राजस्थान में झुंझुनू के अजितपुरा गांव में एक व्यक्ति ने अपनी बेटी रीना को शादी के बाद हेलीकॉप्टर से विदा किया। रीना का विदाई देखने के लिए आसपास के लोगों का तांता लग गया।

दुल्हन के पिता महेंद्र सोलख के मुताबिक, मैंने एक साल पहले बेटी को हेलीकॉप्टर से विदा करने योजना बनाई थी। शादी के दो साल पहले अपने परिवार से यह विचार साझा किया था। इस विदाई की खूूब चर्चा हो रही है। बताया जाता है कि इस शादी में खूब खर्चा हुआ है।

वहीं, राजस्थान में अलवर जिले के मलावली गांव निवासी वरिष्ठ शिक्षक रमेशचंद्र मीणा सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद अपनी पत्‍‌नी की इच्छा पूरी करने के लिए हेलीकॉप्टर से गांव पहुंचे थे। मीणा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सोराई से सेवानिवृत्ति हुए थे।

इस मौके पर मीणा और उनकी पत्‍‌नी को स्कूल में कार्यक्रम आयोजित कर छात्रों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने विदाई दी। मीणा विदाई समारोह के बाद अपनी पत्‍‌नी के साथ हेलीकॉप्टर में सवार हुए और 22 किलोमीटर दूर अपने गांव मलावली पहुंचे। इस दौरान गांव में जबर्दस्त भीड़ उमड़ी। अपने गांव में हेलीकॉप्टर देखकर ग्रामीण बेहद रोमांचित हो रहे थे

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पिता ने पूरा की बेटी की इच्छा…हेलीकॉप्टर से करवाई बेटी की विदाई

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New Delhi : राजस्थान में झुंझुनू के अजितपुरा गांव में एक व्यक्ति ने अपनी बेटी रीना को शादी के बाद हेलीकॉप्टर से विदा किया। रीना का विदाई देखने के लिए आसपास के लोगों का तांता लग गया।

दुल्हन के पिता महेंद्र सोलख के मुताबिक, मैंने एक साल पहले बेटी को हेलीकॉप्टर से विदा करने योजना बनाई थी। शादी के दो साल पहले अपने परिवार से यह विचार साझा किया था। इस विदाई की खूूब चर्चा हो रही है। बताया जाता है कि इस शादी में खूब खर्चा हुआ है।

वहीं, राजस्थान में अलवर जिले के मलावली गांव निवासी वरिष्ठ शिक्षक रमेशचंद्र मीणा सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद अपनी पत्‍‌नी की इच्छा पूरी करने के लिए हेलीकॉप्टर से गांव पहुंचे थे। मीणा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सोराई से सेवानिवृत्ति हुए थे।

इस मौके पर मीणा और उनकी पत्‍‌नी को स्कूल में कार्यक्रम आयोजित कर छात्रों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने विदाई दी। मीणा विदाई समारोह के बाद अपनी पत्‍‌नी के साथ हेलीकॉप्टर में सवार हुए और 22 किलोमीटर दूर अपने गांव मलावली पहुंचे। इस दौरान गांव में जबर्दस्त भीड़ उमड़ी। अपने गांव में हेलीकॉप्टर देखकर ग्रामीण बेहद रोमांचित हो रहे थे

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