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10 आतं’कि’यों को मा’रकर श’हीद हुए थे कमांडो मोहननाथ..घा’यल होने के बाद भी आतं’कि’यों को मा’रते रहे

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New Delhi : देश के लिए हमारे जवान अपनी जा’न दे जाते हैं और अपने पीछे अपनी वीरता की कहानियां छोड़ जाते हैं। आज हम आपके लिए एक ऐसे ही वीर की कहानी लाए हैं। जिनका नाम कमांडो मोहन नाथ है। वो 2015 में श’हीद हुए थे।कमांडो मोहन नाथ गोस्वामी ने जम्मू-क’श्मीर में 11 दिन में 10 आ’तंकियों को मा’र गि’राया था।

2016 में श’हीद मोहन नाथ को अशोक चक्र से नवाजा गया। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनकी पत्नी भावना गोस्वामी को ये सम्मान दिया। 2 सितंबर 2015 को गोस्वामी की कुपवाड़ा डिस्ट्रिक्ट के हफरूदा जं’गल में आ’तंकियों से मुठभे’ड़ हुई थी। गोस्वामी ने गं’भीर रूप से घा’यल होने के बावजूद आ’तंकियों को मा’र गि’राया और अपने साथियों की जा’न बचाने में कामयाब रहे। बाद में गोस्वामी भी श’हीद हो गए थे। बता दें कि अशोक चक्र शांति काल में दिया जाने वाला सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है। जिसे परमवीर चक्र के बराबर माना जाता है।

गोस्वामी ने 2002 में आर्मी ज्वाइन की थी। वे आर्मी की स्पेशल फोर्सेस में कमांडो थे। तीन बार हुए ए’नकाउं’टर में 11 टेर’रिस्ट को मा’र गिरा’या था। श’हीद होने के दौरान वे जम्मू-कश्मीर में पैराशूट रेजीमेंट की 9th बटालियन में तैनात थे। मोहन नाथ मूल रूप से उत्तराखंड के नैनीताल के रहने वाले थे। परिवार में उनकी पत्नी और सात साल की बेटी है।

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बचपन से अंधा था तो लोग बुलाते थे जोकर, ऑडियो सुन-सुनकर की पढ़ाई और बन गया IAS ऑफिसर

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New Delhi : दुनिया में ज्यादातर दिव्यांग लोगों का हर पल मजाक बनाया जाता है, लोग उन्हें उनकी स्थिति या शरीर की कमियों को देखकर जोकर समझते हैं। ऐसे ही एक नेत्रहीन IAS ऑफिसर हैं, जिन्हें लोग जोकर समझते थे। ‘भारत की कुल आबादी के 2 प्रतिशत लोग दिव्यांग है। ये दिव्यांग ऐसे हैं जो हर पल अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं और हर दिन जीत हासिल भी कर रहे हैं। ऐसे ही एक IAS हैं Kempahonnaiah..इनका जन्म कर्नाटक में हुआ था। ये आज उन लोगों के लिए मिसाल हैं जो खुद को कमजोर समझते हैं।

सिविल सर्विस की परीक्षा में 340वी रैंक मिली थी। ये 2017 बैच के IAS ऑफिसर हैं। ये देख नहीं सकते हैं, लेकिन फिर भी इस मुकाम पर हैं। इस एग्जाम को पास करने के लिए इनकी पत्नी ने भी इनका बहुत साथ दिया था। नेत्रहीन होने के कारण वह आसानी से पढा़ई नहीं कर सकते थे इसलिए उनकी पत्नी ने उनके लिए ऑडियो नोट्स बनाये जिससे वह सुन-सुनकर पढ़े सके। जैसा पत्नी ने सोचा था ठीक वैसा ही हुआ। ऑडियो सुन-सुनकर इन्होंने पढ़ाई की और इस मुकाम पर पहुंच गए कि IAS बन गए।

उन्होंने कहा कि दिव्यांग कम्युनिटी से जुडे़ होने पर मुझे बहुत गर्व है। मैं बहुत खुश हूं कि मैं इस कम्युनिटी का हिस्सा हूं। मैंने हमेशा यह माना है कि ‘हैंडीकैप’ शब्द दो पोजिटिव शब्दों से बना है। इसमें वर्ड हैंडी और कैप एक दूसरे का हमेशा साथ देते हैं। किसी इंसान के लिए कैप एक तरह से धूप से बचाने के लिए एक छांव की तरह काम करता है। ‘मैंने 3rd क्लास में अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। एक गर्वमेंट ब्लाइंड स्कूल से पढा़ई की। मैंने अपने पूरे जीवन में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में ही पढाई की है।

उनके बड़े भाई सी एच नानजप्पा भी दिव्यांग हैं। उन्होंने कहा पोस्टिंग होने से पहले कहा था कि मैं हर हाल में विकलांगों की मदद करूंगा। उन्हें हर तरह की सुविधाएं दूंगा। उन्होंने बताया जब मैं पढा़ई कर रहा था तो देख न पाने के कारण मैं कभी भी कपडे़ परफेक्ट तरीके से नहीं पहन पाता था, न ही अपने काम को सही तरह से कर सकता था। यह सब देखकर लोग मेरा मजाक बनाया करते थे और मुझे एक जोकर भी समझते थे। मैं दिव्यांगों की स्थिति को ठीक करने की कोशिश हमेशा करता रहूंगा। मैं नहीं चाहता जिस स्थिति से मैं गुजरा हूं उस स्थिति का सामना कोई और भी करे।

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पिता ने पूरी की बेटी की इच्छा…हेलीकॉप्टर से करवाई बेटी की विदाई

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New Delhi : राजस्थान में झुंझुनू के अजितपुरा गांव में एक व्यक्ति ने अपनी बेटी रीना को शादी के बाद हेलीकॉप्टर से विदा किया। रीना का विदाई देखने के लिए आसपास के लोगों का तांता लग गया।

दुल्हन के पिता महेंद्र सोलख के मुताबिक, मैंने एक साल पहले बेटी को हेलीकॉप्टर से विदा करने योजना बनाई थी। शादी के दो साल पहले अपने परिवार से यह विचार साझा किया था। इस विदाई की खूूब चर्चा हो रही है। बताया जाता है कि इस शादी में खूब खर्चा हुआ है।

वहीं, राजस्थान में अलवर जिले के मलावली गांव निवासी वरिष्ठ शिक्षक रमेशचंद्र मीणा सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद अपनी पत्‍‌नी की इच्छा पूरी करने के लिए हेलीकॉप्टर से गांव पहुंचे थे। मीणा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सोराई से सेवानिवृत्ति हुए थे।

इस मौके पर मीणा और उनकी पत्‍‌नी को स्कूल में कार्यक्रम आयोजित कर छात्रों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने विदाई दी। मीणा विदाई समारोह के बाद अपनी पत्‍‌नी के साथ हेलीकॉप्टर में सवार हुए और 22 किलोमीटर दूर अपने गांव मलावली पहुंचे। इस दौरान गांव में जबर्दस्त भीड़ उमड़ी। अपने गांव में हेलीकॉप्टर देखकर ग्रामीण बेहद रोमांचित हो रहे थे

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पिता ने पूरा की बेटी की इच्छा…हेलीकॉप्टर से करवाई बेटी की विदाई

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New Delhi : राजस्थान में झुंझुनू के अजितपुरा गांव में एक व्यक्ति ने अपनी बेटी रीना को शादी के बाद हेलीकॉप्टर से विदा किया। रीना का विदाई देखने के लिए आसपास के लोगों का तांता लग गया।

दुल्हन के पिता महेंद्र सोलख के मुताबिक, मैंने एक साल पहले बेटी को हेलीकॉप्टर से विदा करने योजना बनाई थी। शादी के दो साल पहले अपने परिवार से यह विचार साझा किया था। इस विदाई की खूूब चर्चा हो रही है। बताया जाता है कि इस शादी में खूब खर्चा हुआ है।

वहीं, राजस्थान में अलवर जिले के मलावली गांव निवासी वरिष्ठ शिक्षक रमेशचंद्र मीणा सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद अपनी पत्‍‌नी की इच्छा पूरी करने के लिए हेलीकॉप्टर से गांव पहुंचे थे। मीणा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सोराई से सेवानिवृत्ति हुए थे।

इस मौके पर मीणा और उनकी पत्‍‌नी को स्कूल में कार्यक्रम आयोजित कर छात्रों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने विदाई दी। मीणा विदाई समारोह के बाद अपनी पत्‍‌नी के साथ हेलीकॉप्टर में सवार हुए और 22 किलोमीटर दूर अपने गांव मलावली पहुंचे। इस दौरान गांव में जबर्दस्त भीड़ उमड़ी। अपने गांव में हेलीकॉप्टर देखकर ग्रामीण बेहद रोमांचित हो रहे थे

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